गन्ने की बुआई का अपनाएं ये तरीका, मिलेगा दो से तीन गुना ज्यादा होगा उत्पादन

गन्ने की बुवाई का अपनाएं ये तरीका, मिलेगा दो से तीन गुना ज्यादा होगा उत्पादन नए-नए तरीके अपनाकर वे जैविक तरीके से गन्ने की लागत कम कर रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. नर्सरी विधि से गन्ने के पौधे रोपने से उन्हें एक एकड़ में 30 से 40 क्विंटल बीज के स्थान पर 2 से 2.5 क्विंटल बीज से अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ है

उर्वरकों का उचित उपयोग

खेत की मिट्टी का परीक्षण करने पर फसल में 5 किग्रा. आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे सल्फर आदि मिलाए गए। उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग करने के स्थान पर संतुलित मात्रा एवं उचित तरीके से उर्वरकों का प्रयोग किया गया। बुआई के 32 दिनों के बाद कोराजन को पहली बार पानी के साथ छिड़का गया और 55 दिनों के बाद यूरिया की टॉप ड्रेसिंग की गई।

सिंचाई करते समय जल प्रबंधन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता था कि पानी बहुत कीमती है। इसलिए जितना हो सके इसे बचाना चाहिए और इसे बिल्कुल भी बर्बाद नहीं करना चाहिए। इसके लिए आवश्यकतानुसार 15 बार हल्की सिंचाई ही की गई। बाकी कसर बारिश ने पूरी कर दी. मेड़ बनाकर वर्षा जल का उपयोग खेत में किया जाता था।

 

इन किस्मों का करते हैं इस्तेमाल राकेश गन्ने की छह-सात किस्मों का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें 86032, 3102, 238, 8005, 1001, संकेश्वर 92, 93 किस्म का उपयोग किया जाता है।

नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के किसान राकेश दुबे अपने क्षेत्र के सफल गन्ना किसानों में से एक हैं। । गन्ने की खेती में अपने 20 साल के अनुभव को साझा करते हुए राकेश दुबे कहते हैं, “पहले जब हम गन्ने के बीज बोते थे

तो लागत बहुत अधिक होती थी, एक एकड़ खेत में 30 से 40 क्विंटल बीज लगता था। इतने सारे बीजों की माल ढुलाई, मजदूरी और बीज उपचार की लागत बहुत अधिक थी। ये बीज जमेंगे या नहीं, इसका पता बुआई के एक से डेढ़ महीने बाद चलता था।

गन्ने के बीज का चयन एवं मात्रा:-

शुद्ध, रोग और कीट मुक्त, अत्यधिक उर्वरित और पानी वाली नर्सरी से बीज चुनें। गन्ने के शीर्ष 1/3 भाग में अपेक्षाकृत अच्छा संघनन होता है। गन्ने की मोटाई के अनुसार 50-60 क्विंटल (लगभग 37.5 हजार तीन आँख वाले अथवा 56.00 हजार दो आँख वाले पांडा प्रति हेक्टेयर) बीज की आवश्यकता होती है। देर से बुआई करने पर उपरोक्त बीज की तुलना में डेढ़ गुना बीज की आवश्यकता होती है।

गन्ने की खेती में ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:-

  •  अंतरवर्तीय फसलों हेतु पृथक-पृथक संस्तुतियों के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति समय से की जाय।
  •  कटाई के बाद जितनी जल्दी हो सके गन्ने में सिंचाई और नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग करके निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।
  •  पहले से अंकुरित गन्ने के पेड़ वाले खाली स्थानों पर गैप फिलिंग करायी जाये।
  •  जलजमाव की स्थिति में तत्काल जल निकासी की व्यवस्था की जाये.
  • नमी संरक्षण एवं खरपतवार नियंत्रण हेतु अंकुरण पूर्ण होने पर 10 से.मी. रोग/कीट रहित गन्ने की पत्ती रोपित करें।
  • पंक्तियों के बीच में एक मोटी परत बिछा देनी चाहिए.
  •  सीमित सिंचाई संसाधनों की स्थिति में वैकल्पिक नालों से सिंचाई करना लाभकारी पाया गया है।
  •  क्षारीय मिट्टी में गामा बीएचसी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • छेदक कीट के नियंत्रण के लिए खेत में पर्याप्त नमी होने की स्थिति में अप्रैल-मई माह में तथा जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक कीट से प्रभावित पौधों को खेत से हटाते रहें, 30 किलोग्राम। ./हे. गन्ने की लाइनों में कार्बोफ्यूरान 3जी रुपये की दर से डालें.
  •  जल भराव वाले क्षेत्रों में 5 से 10 प्रतिशत यूरिया का पर्णीय छिड़काव लाभकारी पाया गया है।
  •  यदि वर्षा ऋतु में 20 दिनों तक वर्षा न हो तो सिंचाई अवश्य करनी चाहिए।

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